ABHISHEK BANERJEE

“यूसुफ पठान के नाम पर हमसे राय ली होती तो बेहतर होता” – अभिषेक बनर्जी का केंद्र को करारा जवाब

कोलकाता: पहलगाम आतंकी हमले के बाद बने सियासी तूफान में एक और मोड़ तब आया जब तृणमूल कांग्रेस के कद्दावर नेता और सांसद अभिषेक बनर्जी ने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने दो टूक कहा कि सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल में तृणमूल का प्रतिनिधि कौन होगा, यह तय करने का अधिकार सिर्फ पार्टी को है, भाजपा को नहीं।

पूर्व क्रिकेटर और तृणमूल सांसद यूसुफ पठान का नाम केंद्र सरकार द्वारा प्रतिनिधिमंडल में शामिल किए जाने पर अभिषेक बनर्जी ने आपत्ति जताते हुए कहा, “केंद्र को पहले हमसे चर्चा करनी चाहिए थी। यह निर्णय पूरी तरह पार्टी की भीतरी बातचीत का हिस्सा था। हमारा मकसद किसी का अपमान करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि प्रतिनिधिमंडल में पार्टी की नीति और राष्ट्रीय दृष्टिकोण को साफ़ तौर पर रखा जा सके।”

बता दें कि पाकिस्तान के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का पक्ष रखने के लिए बनाए गए प्रतिनिधिमंडल में यूसुफ पठान को शामिल किया गया था, लेकिन ममता बनर्जी के निर्देश पर पार्टी ने अचानक उनका नाम वापस ले लिया। इसके बाद भाजपा ने तृणमूल पर ‘तुष्टीकरण की राजनीति’ करने का आरोप लगाया और इसे ‘राष्ट्रीय हित के ऊपर राजनीति’ करार दिया।

अभिषेक बनर्जी ने पलटवार करते हुए कहा, “तृणमूल ही एकमात्र पार्टी है जो राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर राजनीति से ऊपर उठकर केंद्र सरकार का समर्थन करती है। लेकिन यह तय करना कि प्रतिनिधि कौन होगा, पूरी तरह पार्टी का विशेषाधिकार है।”

सूत्रों के मुताबिक, शनिवार रात केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने यूसुफ पठान से संपर्क कर उन्हें प्रतिनिधिमंडल में शामिल होने का न्योता दिया था। पासपोर्ट विवरण भी लिया गया था। मगर अगली ही सुबह तृणमूल ने साफ कर दिया कि यूसुफ प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा नहीं होंगे।

अब सवाल उठता है – क्या यह केवल राजनीतिक रणनीति थी या फिर तृणमूल का केंद्र को संदेश देने का तरीका? जो भी हो, यूसुफ पठान के नाम ने इस बहस को गरमा दिया है और इसकी गूंज आने वाले दिनों में भी सुनाई दे सकती है।

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