न्यूयॉर्क। न्यूयॉर्क पर हुए 9/11 आतंकवादी हमले के दौरान साहसिक नेतृत्व के लिए “हीरो ऑफ 9/11” की उपाधि पाने वाले पूर्व पुलिस कमिश्नर बर्नार्ड बी. केरिक अब इस दुनिया में नहीं रहे। गुरुवार को 69 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। केरिक का जीवन जहां एक ओर बहादुरी और उपलब्धियों से भरा रहा, वहीं विवादों ने भी उनका पीछा नहीं छोड़ा।
साहस की मिसाल, विवादों का साया
11 सितंबर, 2001 को वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए भयावह हमले के दौरान बर्नार्ड केरिक ने हालात को संभालने में अहम भूमिका निभाई। इसी के चलते उन्हें राष्ट्रीय नायक के रूप में सम्मानित किया गया। लेकिन बाद में भ्रष्टाचार और टैक्स से जुड़े मामलों में दोषी ठहराए जाने के बाद उन्हें जेल की सजा भी काटनी पड़ी, जिससे उनकी छवि को गहरा धक्का लगा।
गिउलिआनी के करीबी से पुलिस प्रमुख तक का सफर
केरिक का सफर एक हाई स्कूल ड्रॉपआउट से लेकर न्यूयॉर्क पुलिस विभाग के सबसे बड़े पद तक का रहा। 1993 में उन्होंने तत्कालीन मेयर रुडोल्फ गिउलिआनी के अंगरक्षक के रूप में काम किया और फिर उनके करीबी बनते चले गए। अगस्त 2000 में बिना कॉलेज डिग्री के उन्हें न्यूयॉर्क का पुलिस कमिश्नर बनाया गया, जिस पर कई सवाल भी उठे। बाद में 2002 में उन्होंने डिग्री पूरी की।
अंतरराष्ट्रीय पहचान और सम्मान
उनके नेतृत्व से प्रभावित होकर ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने उन्हें ब्रिटिश साम्राज्य का कमांडर बनाया। पुलिस विभाग से रिटायर होने के बाद केरिक ने गिउलिआनी पार्टनर्स और अपनी निजी कंसल्टिंग फर्म के जरिए कई देशों के शीर्ष नेताओं को सुरक्षा सलाह दी, जिनमें जॉर्डन, गुयाना और यूएई शामिल हैं।
इराक से लेकर ट्रंप तक की यात्रा
2003 में इराक युद्ध के बाद तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश ने उन्हें इराक का आंतरिक मंत्री नियुक्त किया। इसके एक साल बाद उन्हें होमलैंड सिक्योरिटी विभाग का प्रमुख बनाने की घोषणा की गई, लेकिन एक हफ्ते में ही नाम वापस ले लिया गया। वर्ष 2020 में डोनाल्ड ट्रंप ने उन्हें पूर्ण माफी दी। ट्रंप के वह हमेशा कट्टर समर्थक रहे।
व्यक्तिगत जीवन और स्वीकारोक्ति
बर्नार्ड केरिक का जन्म 1955 में न्यू जर्सी के नेवार्क में हुआ था। एक साधारण परिवार से आए केरिक की जिंदगी में तीन शादियां, एक कोरियन बेटी और कई उतार-चढ़ाव रहे। 2005 में उन्होंने अपने जीवन को लेकर कहा था, “मैंने कुछ गलत फैसले किए, लेकिन मेरी उपलब्धियां उनसे कहीं ज्यादा बड़ी हैं।”
बर्नार्ड केरिक की कहानी बहादुरी, अवसर, विवाद और पुनरुत्थान की एक अनोखी मिसाल है। एक ऐसा शख्स जिसने अपने कार्यकाल में इतिहास रचा और अपने जीवन के अंत तक उसे नई व्याख्या देने की कोशिश की।



