DROUPADI MURMU, PRESIDENT

राष्ट्रपति ने सुप्रीम कोर्ट को भेजे 14 अहम सवाल, मांगी राज्य विधेयकों पर समयसीमा की स्पष्टता

नई दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राज्य सरकारों के विधेयकों को मंजूरी देने के लिए समयसीमा तय करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट से महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 143 के तहत सुप्रीम कोर्ट को 14 सवालों वाला प्रेसिडेंशियल रेफरेंस भेजा है, जिसमें राज्यपाल और राष्ट्रपति के अधिकारों और सीमाओं को लेकर कई अहम मुद्दे उठाए गए हैं।

क्या राज्यपालों के लिए कानून मंजूर करने की कोई समयसीमा तय की जा सकती है?

प्रेसिडेंशियल रेफरेंस में यह सवाल उठाया गया है कि क्या सुप्रीम कोर्ट अनुच्छेद 201 के तहत राष्ट्रपति को यह तय करने का अधिकार दे सकता है कि राज्यपाल को विधेयकों पर तीन महीने के भीतर फैसला करना होगा, जबकि संविधान में ऐसी कोई स्पष्ट समयसीमा नहीं है। इसके साथ ही अनुच्छेद 200 के तहत राज्यपालों के सामने रखे गए विधेयकों के संबंध में उनके संवैधानिक विकल्पों पर भी सुप्रीम कोर्ट से स्पष्ट निर्देश मांगे गए हैं।

राज्यपाल और राष्ट्रपति के अधिकार कब और कैसे लागू होंगे?

राष्ट्रपति ने यह भी पूछा है कि क्या न्यायालय आदेश दे सकते हैं कि राज्यपाल और राष्ट्रपति अनुच्छेद 200 और 201 के तहत कब और कैसे कार्रवाई करें। इसके अलावा, अनुच्छेद 201 के तहत राष्ट्रपति की सहमति की वैधता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में विरोधाभासी फैसले भी आए हैं, जिन पर भी सुप्रीम कोर्ट की राय मांगी गई है।

संविधान की सर्वोच्च शक्तियों का दायरा भी सवालों के घेरे में

इस प्रेसिडेंशियल रेफरेंस में अनुच्छेद 142 की भूमिका और उसके दायरे पर भी कोर्ट की सलाह मांगी गई है, जो संविधान के सर्वोच्च आदेश संबंधी प्रावधानों को नियंत्रित करता है।

क्या है मामला और क्यों उठे ये सवाल?

यह प्रेसिडेंशियल रेफरेंस 13 मई को जारी किया गया था, जो मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना के कार्यकाल का अंतिम दिन था। अब इस संदर्भ पर फैसला लेने के लिए नई संविधान पीठ गठित होगी, जिसका नेतृत्व वर्तमान मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई करेंगे।

यह कदम तमिलनाडु सरकार द्वारा दायर याचिका के बाद उठाया गया है, जिसमें राज्यपाल की ओर से 10 विधेयकों को मंजूरी देने में देरी और राष्ट्रपति द्वारा उन्हें सुरक्षित रखने की कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक ठहराया था। 8 अप्रैल के उस फैसले में कोर्ट ने राज्यपाल और राष्ट्रपति को विधेयकों पर कार्रवाई के लिए समयसीमा तय करने का निर्देश अनुच्छेद 142 के तहत दिया था, जिससे यह विवाद और गहरा गया।

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