नई दिल्ली। कभी विदेशी खिलौनों पर निर्भर रहने वाला भारत अब खुद खिलौना निर्माण में आत्मनिर्भर बन चुका है और 153 देशों को खिलौने निर्यात कर रहा है। यह कहना है केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल का, जिन्होंने शुक्रवार को ‘टॉय बिज इंटरनेशनल बी2बी एक्सपो 2025’ के उद्घाटन अवसर पर यह जानकारी दी।
गोयल ने कहा कि भारत में खिलौना उद्योग का यह कायाकल्प केंद्र सरकार की नीतिगत प्रतिबद्धताओं, गुणवत्ता मानकों के सख्त पालन और स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स को बढ़ावा देने से संभव हुआ है।
उन्होंने बताया कि गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (QCO) के चलते अब भारतीय खिलौने न केवल सुरक्षित और टिकाऊ हैं, बल्कि वैश्विक मानकों पर भी खरे उतरते हैं। यही वजह है कि अब ‘मेड इन इंडिया’ टैग वाले खिलौनों की मांग अंतरराष्ट्रीय बाजारों में लगातार बढ़ रही है।
पीयूष गोयल ने कहा, “भारत की 1.4 अरब की जनसंख्या एक बड़ा घरेलू बाजार है, जो हमारे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को स्केल और प्रतिस्पर्धा की शक्ति देता है। इससे हम वैश्विक बाजार में मजबूती से उतर सकते हैं।”
उन्होंने यह भी ऐलान किया कि सरकार अब खिलौना उद्योग के लिए एक नई प्रोत्साहन योजना पर काम कर रही है। इस योजना के तहत डिजाइन इनोवेशन, गुणवत्तापूर्ण निर्माण, उन्नत पैकेजिंग और ब्रांडिंग जैसे क्षेत्रों में भारतीय कंपनियों को वैश्विक स्तर पर सक्षम बनाने का प्रयास किया जाएगा।
गोयल ने उद्योग जगत से आग्रह किया कि वे ब्रांडिंग, पैकेजिंग और प्रोडक्ट डिजाइन पर विशेष ध्यान दें, ताकि भारतीय खिलौने विदेशी बाजारों में भी अपनी अलग पहचान बना सकें।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान का ज़िक्र करते हुए कहा कि शुरुआत में भले ही कुछ लोग इस पर संदेह करते थे, लेकिन आज इसका असर साफ दिख रहा है। ‘आत्मनिर्भर भारत’ का सपना अब खिलौनों के क्षेत्र में भी साकार हो रहा है।
खास बात यह रही कि गोयल ने स्टार्टअप्स की भूमिका की भी सराहना की। उन्होंने बताया कि इनोवेटिव खिलौनों पर काम कर रहे नए उद्यमियों को प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत कर्ज सुविधा दी जा रही है, जिसे अब 20 साल तक बढ़ा दिया गया है।
इसके अलावा, एमएसएमई मंत्रालय द्वारा देश भर में 18 खिलौना क्लस्टर्स को विकसित कर घरेलू उत्पादन को और ताकत दी जा रही है।
कुल मिलाकर, भारत का खिलौना उद्योग अब सिर्फ खेल की चीज नहीं रहा—यह आत्मनिर्भरता, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा की मिसाल बन रहा है।



