बीजापुर में नक्सल विरोधी अभियान का नौवां दिन: तेलंगाना में शांति वार्ता की मांग से सुस्त पड़ी कार्रवाई

जगदलपुर: छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में स्थित करेंगुट्टा पहाड़ पर चल रहे देश के सबसे बड़े नक्सल विरोधी अभियान का आज नौवां दिन है। यह क्षेत्र नक्सलियों के लिए सुरक्षित माना जाता है, और यहां की घनी जंगलों में तापमान 40 से 43 डिग्री के बीच बना हुआ है। जैसे-जैसे अभियान आगे बढ़ा, यह राजनीति के केंद्र में भी आ गया। तेलंगाना की कांग्रेस सरकार और विपक्ष ने नक्सलियों के साथ शांति वार्ता का समर्थन किया, जिससे इस अभियान की गति धीमी हो गई है।

तेलंगाना सरकार ने अभियान से किया किनारा, शांति वार्ता की मांग
तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के साथ शांति वार्ता समिति के सदस्य जैसे दुर्गा प्रसाद, प्रो. हरगोपाल और न्यायमूर्ति चंद्रकुमार ने बैठक की। इसमें शांति वार्ता की पहल करने और नक्सल अभियान को रुकवाने की बात उठाई। समिति ने मुख्यमंत्री से कर्रेगुट्टा में युद्धविराम के लिए केंद्र पर दबाव बनाने को कहा, जिस पर मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि इस मुद्दे पर चर्चा की जाएगी। इसके बाद, तेलंगाना की कांग्रेस सरकार और विपक्ष ने शांति वार्ता का समर्थन किया, जिससे तेलंगाना सरकार ने इस अभियान से किनारा कर लिया।

तेलंगाना की सीमा पर सुस्त पड़ा अभियान
इसका नतीजा यह हुआ कि जहां नक्सल विरोधी अभियान चल रहा है, वहां तेलंगाना का लगभग 40 से 50 प्रतिशत हिस्सा समाहित है, और तेलंगाना के समर्थन से अभियान को अपेक्षित सफलता नहीं मिल रही है। जैसे-जैसे अभियान आगे बढ़ा, नक्सली, जिनमें मुख्य रूप से हिड़मा और अन्य बड़े कैडर शामिल हैं, तेलंगाना के जंगलों में छिपने में सफल रहे और मौके से फरार हो गए।

तेलंगाना पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल
इस अभियान में तेलंगाना पुलिस और ग्रेहाउंड्स की कोई भूमिका नहीं है। तेलंगाना के भद्रादि कोत्तागुडेम के एएसपी विक्रांत सिंह ने बताया कि इस ऑपरेशन में केवल सीआरपीएफ और कोबरा बटालियन शामिल हैं। तेलंगाना के नक्सली बड़े कैडर, जिनमें पोलित ब्यूरो और सेंट्रल कमेटी के सदस्य भी शामिल हैं, प्रमुख रूप से तेलंगाना के ही हैं। बस्तर से माड़वी हिड़मा अकेला ऐसा शख्स है, जिसे सेंट्रल कमेटी में शामिल किया गया है।

राजनीतिक हलचल का असर नक्सल विरोधी अभियान पर
तेलंगाना सरकार और विपक्ष द्वारा शांति वार्ता का समर्थन करने से नक्सल विरोधी अभियान में रुकावटें आ रही हैं। यह स्पष्ट हो गया है कि जहां भाजपा विरोधी राजनीतिक दलों की सरकारें होंगी, वहां नक्सल विरोधी अभियान में सुस्ती आ सकती है। इस कारण तेलंगाना सीमा पर सबसे बड़े नक्सल अभियान को सफलता हासिल करने में कठिनाइयाँ आ रही हैं।

नए नेतृत्व के साथ भारतीय सेना और वायु सेना को मिला मजबूत संबल!

अक्षय तृतीया पर श्री बांकेबिहारी मंदिर में भक्ति का महासागर, श्रद्धालुओं का उमड़ा जनसैलाब