नारायणपुर में सुरक्षाबलों की बड़ी कामयाबी: डेढ़ करोड़ के इनामी नक्सली समेत 27 नक्सलियों के शव हेलीकॉप्टर से लाए गए

नारायणपुर। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्र अबूझमाड़ के बोतेर इलाके में बुधवार को सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच हुई भयंकर मुठभेड़ में देश के सबसे खतरनाक और डेढ़ करोड़ रुपये के इनामी नक्सली नम्बाला केशव राव उर्फ बशव राजू सहित कुल 27 नक्सली मारे गए। इन सभी के शवों को भारी सुरक्षा के बीच वायु सेना के एमआई-17 हेलीकॉप्टर से नारायणपुर जिला मुख्यालय लाया गया, जिसे पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार ने भी पुष्टि की है।

बशव राजू की इस मुठभेड़ में मौत न केवल सुरक्षा बलों की बड़ी सफलता है, बल्कि यह भारत में नक्सलवाद के खिलाफ एक ऐतिहासिक जीत भी मानी जा रही है। खास बात यह रही कि खराब मौसम के चलते शवों को हेलीकॉप्टर से तुरंत नहीं पहुंचाया जा सका था, जिसके कारण उन्हें रात भर कड़ी सुरक्षा में रखा गया था। गुरुवार सुबह सूरज की पहली किरण के साथ ही भारी सुरक्षा कवच के बीच शव हेलीकॉप्टर से जिला मुख्यालय लाए गए।

सूत्रों के अनुसार, इस मुठभेड़ में नक्सली दण्डकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के सदस्य मधु, जिन पर 25 लाख का इनाम था, भी मारा गया है। इसके अलावा तेलंगाना कैडर के दो अन्य नक्सली भी इस कार्रवाई में ढेर हुए हैं। अभी बाकी नक्सलियों के नाम पुलिस द्वारा आधिकारिक रूप से जारी नहीं किए गए हैं, लेकिन जल्द विस्तृत जानकारी दी जाएगी।

बशव राजू: नक्सल सेना के सैन्य रणनीतिकार का सफाया

1987 में श्रीलंका की लिट्टे (लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम) के पूर्व सैनिकों से ट्रेनिंग लेकर बशव राजू ने नक्सली संगठन को बस्तर में एक प्रभावशाली मिलिट्री आर्मी का रूप दिया था। उनके बनाए गए युद्ध मॉडल पर काम करते हुए नक्सलियों ने अब तक हजारों जानलेवा हमले किए हैं। वे हिड़मा जैसे कुख्यात नक्सली नेता के गुरु माने जाते थे और सबसे खतरनाक पीएलजीए बटालियन की स्थापना भी उन्हीं की देन थी।

डीआरजी जवानों की भूमिका, ऑपरेशन की सफलता का मुख्य कारण

इस ऑपरेशन में डॉग राइफल गन (डीआरजी) के जवानों को विशेष रूप से तैनात किया गया था क्योंकि वे माड़ क्षेत्र की हर पत्थर-चट्टान से परिचित थे। इस बार पूरी मुहिम में सिर्फ डीआरजी जवान ही थे, जिससे संचालन में बेहतर समन्वय और सफलता मिली। एक हजार से अधिक जवानों ने मिलकर नक्सली संगठन के महासचिव बशव राजू को अंजाम तक पहुंचाया।

सफलता के बाद सुरक्षा बल सतर्क

पिछले डेढ़ वर्षों में सैकड़ों नक्सलियों को मार गिराने के बाद भी बशव राजू की मौत से बस्तर क्षेत्र में हलचल मची हुई है। सुरक्षाबल पूरी तरह अलर्ट पर हैं और किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं। केंद्र सरकार ने भी सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क रहने के सख्त निर्देश दिए हैं।

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