कोच्चि के पास समुद्र में डूबा कंटेनर जहाज, भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल ने दिखाई बहादुरी, 24 लोगों की जान बचाई

नई दिल्ली। कोच्चि तट से लगभग 38 समुद्री मील दूर समुद्र में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब लाइबेरियाई झंडे वाला कंटेनर पोत एमएससी एल्सा-3 जलप्रलय की चपेट में आकर डूब गया। लेकिन समय रहते भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल की तत्परता ने बड़ी त्रासदी को टाल दिया। जहाज पर सवार 24 सदस्यीय चालक दल को सुरक्षित बचा लिया गया है, जिनमें रूस, यूक्रेन, जॉर्जिया और फिलीपींस के नागरिक शामिल हैं।

संकट की शुरुआत

184 मीटर लंबा यह जहाज 23 मई को विझिनजाम बंदरगाह से कोच्चि की ओर रवाना हुआ था। रास्ते में तकनीकी खराबी के चलते पोत का संतुलन बिगड़ गया और वह स्टारबोर्ड की ओर 26 डिग्री झुक गया। हालात बिगड़ते देख 09 क्रू सदस्य तुरंत लाइफ राफ्ट में चले गए, जबकि कप्तान, मुख्य अभियंता और इंजीनियर जहाज पर डटे रहे।

रेस्क्यू मिशन: हवा से समंदर तक

24 मई की दोपहर, जैसे ही कोच्चि से 38 समुद्री मील दूर एमएससी एल्सा-3 से संकट का संदेश मिला, भारतीय तटरक्षक बल (ICG) हरकत में आ गया। कम्युनिकेशन टूटने के बाद कोच्चि स्थित समुद्री बचाव उपकेंद्र (MRSC) ने तुरंत ICG डोर्नियर विमान को भेजा, जिसने दो लाइफ राफ्ट्स को समुद्र में बहते पाया। इसके बाद ICG जहाज ‘अर्नवेश’, व्यापारी पोत ‘एमवी हान यी’ और भारतीय नौसेना का जहाज ‘आईएनएस सुजाता’ भी बचाव कार्य में शामिल हो गए।

जानलेवा खतरे के बीच सुरक्षित निकाला गया दल

जहाज पर सवार कुल 24 लोगों को अलग-अलग माध्यमों से सुरक्षित निकाल लिया गया। इनमें 09 लोग लाइफ राफ्ट्स से ‘एमवी हान यी’ द्वारा, 12 लोग तटरक्षक बल के रेस्क्यू बेड़ा द्वारा और बाकी 03 वरिष्ठ अधिकारी – कप्तान, इंजीनियर और मुख्य अभियंता को ‘आईएनएस सुजाता’ ने अंतिम समय में डूबते जहाज से बचा लिया।

पर्यावरणीय चिंता और तैयारी

एल्सा-3 पर 640 कंटेनर लदे थे, जिनमें से 13 में खतरनाक केमिकल और 12 में कैल्शियम कार्बाइड था। इसके अलावा, जहाज में 84.44 मीट्रिक टन डीजल और 367.1 मीट्रिक टन फर्नेस ऑयल भी मौजूद था। संभावित प्रदूषण को देखते हुए तटरक्षक बल ने विशेष उपकरणों से लैस जहाज ‘सक्षम’ को तैनात किया है और समुद्री पर्यावरण पर नजर रखी जा रही है।

भारतीय समुद्री सुरक्षा की मिसाल

इस पूरे ऑपरेशन ने भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल की मुस्तैदी, समन्वय और साहस को फिर एक बार साबित कर दिया है। संकट के समय में तेज निर्णय और निर्भीक कार्रवाई के चलते एक बड़ी मानवीय त्रासदी को समय रहते टाल दिया गया।


यह घटना भारतीय समुद्री सुरक्षा बलों की चौकसी और तैयारी की मिसाल है, जिसने समय रहते 24 जिंदगियों को समुद्र की गहराई से बाहर निकाल लिया।

JOSH HAZLEWOOD, CRICKET

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