बेंगलुरु। कर्नाटक उच्च न्यायालय ने हुबली दंगा समेत कई गंभीर मामलों में सरकार द्वारा वापस लिए गए 43 आपराधिक मामलों को रद्द कर दिया है। यह फैसला राज्य सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
अधिवक्ता गिरीश भारद्वाज की जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश एन.वी. अंजारिया और न्यायमूर्ति के.वी. अरविंद की खंडपीठ ने कहा कि ऐसे मामलों को बिना न्यायिक समीक्षा के वापस लेना अवैध है और इससे कानूनी प्रक्रिया की अखंडता को नुकसान पहुंचता है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि आपराधिक मामले जनता की सुरक्षा से जुड़े होते हैं, इसलिए इस तरह के आदेशों को गंभीरता से जांचा जाना जरूरी है।
इस याचिका में सरकार द्वारा अक्टूबर 2024 में जारी सरकारी आदेश (GO) की वैधता पर सवाल उठाया गया था। इन 43 मामलों में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, सार्वजनिक संपत्ति विनाश निवारण अधिनियम और धार्मिक संस्थानों के दुरुपयोग को रोकने वाले कानून के तहत गंभीर आरोप थे। खासतौर पर हुबली दंगों का मामला भी इसमें शामिल था, जिसमें भीड़ ने सोशल मीडिया पर विवादित पोस्ट को लेकर पुलिसकर्मियों पर हमला किया था।
2020-21 के दौरान सरकार ने राजनीतिक दबाव के बीच इन मामलों को वापस लिया था, जिसके खिलाफ यह PIL दायर की गई थी। अब कोर्ट के इस फैसले से स्पष्ट संदेश गया है कि न्यायपालिका कानून व्यवस्था और आम जनता की सुरक्षा की रक्षा के लिए कड़ा रुख अपना रही है।
यह निर्णय राज्य सरकार की कानूनी रणनीति पर असर डाल सकता है और भविष्य में आपराधिक मामलों के निपटान में पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।



